झांसी समाचार

Jhansi Hospital GeM Scam: 26.68 लाख का घपला

Jhansi Hospital GeM Scam: झांसी जिला अस्पताल में 26.68 लाख का महाघोटाला

Jhansi Hospital GeM Scam: 26.68 लाख का घपला

Fast2News Jhansi Bureau: उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित जिला अस्पताल में सरकारी खरीद में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। Jhansi Hospital GeM Scam के तहत अस्पताल में लाखों रुपये की सर्जिकल सामग्री और मेडिकल किट बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं।

इस Jhansi Hospital GeM Scam से जुड़े मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि जिस प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. आर.के. सक्सेना के खिलाफ वित्तीय हेराफेरी के आरोप हैं, वे खुद ही इस पूरे मामले की जांच करने का दावा कर रहे हैं।

GeM पोर्टल पर ₹160 की किट ₹1,000 में खरीदने का आरोप

Fast2News Team की विशेष पड़ताल के अनुसार, शिकायतकर्ता शिखा जैन ने झांसी के जिलाधिकारी (DM) और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र सौंपा है। शिकायती पत्र में Jhansi Hospital GeM Scam का पर्दाफाश करते हुए अप्रैल से जून 2026 के बीच हुई खरीद के आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण दिया गया है।

आंकड़ों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने ₹43,35,442 के खरीद आदेश जारी किए। जबकि GeM पोर्टल पर उन्हीं सामग्रियों की वास्तविक दर मात्र ₹16,67,619 थी। इस प्रकार Jhansi Hospital GeM Scam के जरिए सरकारी खजाने को ₹26,67,822 का सीधा नुकसान पहुंचाया गया।

प्रमुख सामग्रियों में दर का अंतर:

  • रैपिड टेस्ट किट: 50 किट के लिए ₹50,000 का ऑर्डर दिया गया। यानी एक किट ₹1,000 में खरीदी गई, जबकि पोर्टल पर कीमत मात्र ₹160 (कुल ₹8,000) थी।

  • ब्लड बैग: 100 ब्लड बैग ₹9,800 में खरीदे गए, जबकि GeM दर ₹74.80 प्रति बैग के हिसाब से कुल ₹7,480 ही थी।

  • सर्जिकल सामग्री: L-1 फर्म के जरिए लगभग ₹17 लाख की सर्जिकल सामग्री खरीदी गई। नियमों को दरकिनार कर टेंडर प्रक्रिया को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़कर (Split Purchasing) काम किया गया।

एनीडेस्क (AnyDesk) से कंप्यूटर एक्सेस देने के गंभीर आरोप

शिकायत में यह भी आरोप है कि Jhansi Hospital GeM Scam को अंजाम देने के लिए बाहरी व्यापारियों के ऑपरेटरों को AnyDesk और TeamViewer के जरिए कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस दिया जाता था। इसके बाद चहेती फर्मों को अधिक दरों पर वर्क ऑर्डर जारी किए गए।

इतना ही नहीं, पोर्टल पर जिस ब्रांड और मानक की मंजूरी ली गई थी, उसकी जगह निम्न स्तर की सामग्री ली गई और बिल सत्यापित कर दिए गए।

डीएम से शुरू हुई जांच, जिला अस्पताल पर आकर उलझी

मामला सामने आने पर जिलाधिकारी ने एडी हेल्थ को जांच के निर्देश दिए। एडी हेल्थ डॉ. आर.के. सोनी ने संयुक्त निदेशक (जेडी हेल्थ) डॉ. जयप्रकाश को जांच अधिकारी बनाया।

जब जेडी हेल्थ ने आरोपी सीएमएस से स्पष्टीकरण मांगा, तो उन्होंने पत्र भेजकर कहा कि वे मामले की जांच खुद कर रहे हैं। Jhansi Hospital GeM Scam में जिस अफसर पर आरोप हैं, वही जांचकर्ता बन बैठा है। सरकारी खरीद नियमों की जानकारी के लिए आप Government e-Marketplace Portal पर विजिट कर सकते हैं।

Data Table: GeM दर बनाम अस्पताल खरीद दर (Rate Chart Table)

सामग्री का नाम कुल मात्रा अस्पताल खरीद दर GeM पोर्टल वास्तविक दर वित्तीय अंतर / क्षति
रैपिड टेस्ट किट 50 किट ₹1,000 / किट (कुल ₹50,000) ₹160 / किट (कुल ₹8,000) ₹42,000 का नुकसान
ब्लड बैग 100 बैग ₹98 / बैग (कुल ₹9,800) ₹74.80 / बैग (कुल ₹7,480) ₹2,320 का नुकसान
सर्जिकल आइटम L-1 फर्म नियम तोड़कर स्प्लिट ऑर्डर टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य ₹17 लाख संदेहास्पद
कुल खरीद बजट विविध सामग्री ₹43,35,442 ₹16,67,619 ₹26,67,822 कुल घोटाला

खबर का सार (एक नज़र में)

विषय / बिंदु विवरण
मुख्य मामला Jhansi Hospital GeM Scam (खरीद में 26.68 लाख का घपला)
आरोपित अधिकारी डॉ. आर.के. सक्सेना (प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक – CMS, जिला अस्पताल झांसी)
शिकायतकर्ता शिखा जैन (शिकायत डीएम, एडी हेल्थ और सीएमओ को भेजी गई)
वित्तीय अनियमितता जारी आदेश: ₹43.35 लाख | वास्तविक GeM कीमत: ₹16.67 लाख | क्षति: ₹26.68 लाख
तकनीकी धांधली AnyDesk/TeamViewer से रिमोट एक्सेस लेकर चहेती फर्मों को दिए गए वर्क ऑर्डर
जांच में पेंच जेडी हेल्थ ने मांगा जवाब तो आरोपी सीएमएस बोले- “हम खुद कर रहे मामले की जांच”
एडी हेल्थ का बयान डॉ. आर.के. सोनी ने पुष्टि की कि जेडी हेल्थ डॉ. जयप्रकाश को जांच सौंपी गई है

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Deepak Rathaur

Founder & Editor-in-Chief, Fast2News Deepak Rathaur is the Founder & Editor-in-Chief of Fast2News, driven by a passion for bringing timely, accurate and meaningful news to readers. He oversees news sourcing, editorial content, publishing and the overall digital direction of Fast2News, with a focus on responsible journalism and clear, reader-first storytelling.

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