Cheteshwar Pujara Retirement क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से लिया संन्यास, जानें उपलब्धियां और शानदार करियर
Cheteshwar Pujara Retirement भारत के 'टेस्ट क्रिकेट स्पेशलिस्ट' का एक युग समाप्त
Cheteshwar Pujara Retirement: जानें क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला
भारतीय क्रिकेट के सबसे धैर्यवान और दृढ़ निश्चयी बल्लेबाजों में से एक, Cheteshwar Pujara ने 24 अगस्त 2025 को एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपने संन्यास की घोषणा करके लाखों प्रशंसकों को भावुक कर दिया है। पुजारा ने बताया कि 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के बाद से उन्होंने एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला था, हालांकि वह घरेलू मैचों में खेलते रहे थे। यह घोषणा क्रिकेट के एक युग का अंत है, जिसमें उन्होंने धैर्य, तकनीक और दृढ़ संकल्प के साथ भारतीय टेस्ट बल्लेबाजी को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
Cheteshwar Pujara का शुरुआती जीवन और प्रेरणा
क्रिकेट के जाने-माने खिलाड़ी Cheteshwar Pujara का जन्म 25 जनवरी 1988 को राजकोट, गुजरात में एक हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम अरविंद पुजारा और माता का नाम पूजा पावरी था। उनके पिता अरविंद पुजारा और चाचा विपिन पुजारी दोनों रणजी ट्रॉफी के खिलाड़ी थे। उनके पिता और चाचा की वजह से ही उनमें क्रिकेट खेलने का उत्साह जाग्रत हुआ। पुजारा ने बचपन से ही कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ क्रिकेट का प्रशिक्षण लिया।
क्रिकेट करियर की शुरुआत: घरेलू और IPL
Cheteshwar Pujara के क्रिकेट करियर की शुरुआत सौराष्ट्र में हुई, जहाँ उन्होंने दिसंबर 2005 से घरेलू क्रिकेट खेलना शुरू किया। दाएं हाथ के बल्लेबाज पुजारा ने भारत के लिए 100 से अधिक टेस्ट मैच खेले हैं और कुछ वनडे मैच भी खेले हैं। वे कई आईपीएल टीमों का भी हिस्सा रहे हैं:
- 2010 में वे कोलकाता नाइट राइडर्स की तरफ से खेले।
- 2011 से 2013 तक वे रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का हिस्सा रहे।
- 2014 में वे किंग्स इलेवन पंजाब की तरफ से खेले।
- 2021 में वे आईपीएल विजेता टीम चेन्नई सुपर किंग्स का भी हिस्सा थे।
Cheteshwar Pujara Retirement: उपलब्धियां और रिकॉर्ड्स
Cheteshwar Pujara Retirement के बाद, उनके टेस्ट करियर की उपलब्धियां एक बार फिर से चर्चा में हैं। उनकी सबसे पहली और बड़ी उपलब्धि 2010 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रही, जहाँ वह सबसे ज्यादा स्कोरर थे। इस प्रदर्शन के लिए अक्टूबर 2011 में बीसीसीआई ने उन्हें ‘D Grade National Contract’ भी दिया था।
- शानदार वापसी: अक्टूबर 2011 में उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ हैदराबाद में 159 रन का शतक जड़कर टेस्ट टीम में दमदार वापसी की।
- लगातार शतक: 2012 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ दो और शतक जड़े, जिनमें एक 206 रन (नॉट आउट) और दूसरा 135 रन का स्कोर था।
- ऑस्ट्रेलिया में जीत का नायक: 2018-19 के ऑस्ट्रेलिया टेस्ट दौरे में भी वह जीत का एक अहम हिस्सा थे।
निष्कर्ष
Cheteshwar Pujara Retirement भारतीय क्रिकेट के एक अध्याय का अंत है। पुजारा ने अपनी बल्लेबाजी से यह साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट में सफलता सिर्फ आक्रामक खेल से नहीं, बल्कि दृढ़ता और धैर्य से भी हासिल की जा सकती है। उनके रिकॉर्ड्स और उपलब्धियां हमेशा भारतीय क्रिकेट के इतिहास में याद रखी जाएंगी।
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